Internet In Hindi Full Information

Internet In Hindi: दोस्तों जैसा कि आप सभी लोग जानते ही है की आज Internet विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क है. फिर भी इन्टरनेट को लेकर मन में बहुत सारी जिज्ञासाएं भरी पड़ी है. जैसे कि इन्टरनेट को हिंदी में क्या कहते है

History of internet in hindi, इन्टरनेट का अविष्कार किसने किया,  इन्टरनेट कैसे काम करता है, इन्टरनेट का मालिक कौन है, types of internet, Fathers Of The Internet in Hindi इत्यादि.

जैसा कि हम सभी लोग जानते है कि इन्टरनेट आज हमारे जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अभिन्न अंग बन चूका है. हमारे दैनिक जीवन में होने वाले बहुत सारे काम आज इन्टरनेट कि सहायता से होने लगे है जैसे कि मनोरंजन, बैंकिंग, एजुकेशन, बिज़नस इत्यादि.

लेकिन फिर भी इन्टरनेट के बारे में बहुत ऐसी बाते है जो हम नहीं जानते है लेकिन जब उसके बारे में किसी से सुनते है तो हमारे मन में यही बात उठती है “यार इसके बारे में तो मुझे पता ही नहीं था“. तो हम इसी से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण और रोचक जानकारी आपको देने जा रहे है. Internet In Hindi

History of internet in hindi

History of internet in hindi: इन्टरनेट का इतिहास बहुत ज्यादा पुराना नहीं है. कायदे में कहा जाए तो इन्टरनेट आज भी अपनी बाल्यवस्था में है है क्यूंकि इन्टरनेट के अविष्कार हुए अभी महज 50 साल हुए है और आज भी यह केवल विश्व के 40% लोगों तक पहुँच पाया है जबकि इसके दायरे में आज 90 प्रतिशत लोग आते है.

आज के History of internet in hindi में स्टेप बाई स्टेप हम internet की full information के जानेंगे. तो सबसे पहले शुरुआत करते है…. Internet In Hindi

Internet in Hindi

बहुत सारे लोगों के मन में जिज्ञासा आती है कि आखिर internet को हिंदी में क्या कहते है. इन्टरनेट को हिंदी में अंतरजाल कहा जाता है. दूसरे तरीके से कहें तो इन्टरनेट का हिंदी नाम “महाजाल” भी है. क्यूंकि यह बहुत सारे कंप्यूटर नेटवर्क का एक जाल ही है. इसलिए इसे महाजाल भी कह सकते है.

Internet Kise Kahte hai?

इन्टरनेट एक दुसरे से जुड़े कई कंप्यूटरों का एक वैश्विक जाल है जो राउटर एवं सर्वर के माध्यम से दुनिया के किसी भी कंप्यूटर को आपस में जोड़ता है. दो या दो से अधिक कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ने के लिए TCP/IP Protocol का प्रयोग होता होता है.

इन्टरनेट का अविष्कार किसने किया

तो अब बात करते है इन्टरनेट का अविष्कार यानि कि internet की खोज किसने की. दोस्तों जैसा कि हम जानते है कि किसी भी रिसर्च को पूरा करने के लिए कई लोगों का महत्वपूर्ण योगदान होता है ठीक इसी प्रकार से इन्टरनेट की खोज में कई वैज्ञानिक का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

सबसे पहले लियोनार्ड क्लेरॉक ने एक योजना बनायीं इस योजना के उद्देश्य अमेरिकी रक्षा विभाग को नयी तकनीक से लैस करना था. इस योजना के अनुसार कई कंप्यूटरों को आपस में जोड़ कर सूचनाओं का आदान प्रदान करना था जिससे कि सेना को जरुरी जानकारी बहुत जल्दी मिल जाए.

इसके बाद सन 1962 में लियोनार्ड क्लेरॉक ने J.C.R. Licklider और Robert Taylor कि मदद से एक नेटवर्क बनाया जिसको इन्होने ने ARPANET नाम दिया. इस ARPANET का इस्तेमाल अमेरिकी रक्षा विभाग में होता था. बाद में TELNET के नाम से इसका व्यावसायिक इस्तेमाल होने लगा.

Father of internet in hindi

ARPANET में एक computer से दूसरे computer से जोड़ने के लिए NCP यानि कि (Network Control Protocol) का इस्तेमाल किया गया था. जबकि आज हम जिस इन्टरनेट का प्रयोग करते है उसमे TCP/IP Protocol का इस्तेमाल किया जाता है.

सन 1974 में विंट सर्फ (Vint Cerf) और बॉब काहन (Bob Kahn) ने एक पेपर प्रकाशित किया जिसे “The Fathers Of The Internet” के नाम से जाना गया. इसी रिसर्च पेपर को प्रकाशित करने के कारण विंट सर्फ को Fathers Of The Internet कहते है.

क्या इन्टरनेट का कोई मालिक है?

अब हर चीज का कोई ना कोई मालिक तो होता ही है. लेकिन आप को जानकर आश्चर्य होगा कि इन्टरनेट का कोई व्यक्ति विशेष मालिक नहीं है. यानी कि इन्टरनेट पर किसी एक व्यक्ति का पूर्ण अधिकार नहीं है.

हालाँकि बड़ी बड़ी कम्पनियाँ जो कनेक्टिविटी स्थापित करने का प्रबंधन करती है और वो कंपनियां जो इन्टरनेट को चलाने के लिए डाटा प्रदान करती है हम उन्हें एक तरीके से आंशिक रूप से इन्टरनेट का मालिक कह सकते है.

Internet Kaise Kaam Karta hai?

दोस्तों क्या आपको भी लगता है कि इन्टरनेट सेटेलाईट के माध्यम से चलता है. अगर हाँ तो आपका सोचा एक हद तक गलत भी हो सकता है. हालाँकि इन्टरनेट को सेटेलाईट के मध्यम से भी चलाया जाता है लेकिन हम जिस इन्टरनेट का उपयोग करते है वो सेटेलाइट के माध्सेयम से नहीं अपितु Opticle Fibres Cable द्वारा हम तक पहुँचता है. Opticle Fibres Cable को सबमरीन केबल भी कहते है.

हम जिस इन्टरनेट का उपयोग करते है वो तीन कम्पनियों के माध्यम से होते हुए हम तक पहुँचता है. हम इन तीनों कंपनियों को तीन भाग में विजभित कर लेते है. Tier 1, Tier 2, Tier 3.

  • Tier 1 में वो कंपनी आती है जिन्होंने ऑप्टिकल फाइबर केबल का नेटवर्क समुद्र के अन्दर से पूरे विश्व भर में फैला रखा है. इन्ही केबल के माध्यम से दुनिया के सारे सर्वर एक दूसरे से कनेक्ट रहते है.
  • Tier 2 में टेलिकॉम कंपनियां जैसे आईडिया, वोडाफ़ोन, एयरटेल जैसी कंपनियां आती है जिनके माध्यम से इन्टरनेट हम तक पहुँचता है.
  • जबकि Tier 3 में लोकल एरिया की छोटी छोटी कंपनिया आती है जैसे तिकोना.

अब होता क्या है कि Tier 3 कि कम्पनियाँ Tier 2 से डाटा खरीदती है और Tier 2 कि कम्पनियाँ Tier 1 की कंपनी से प्रति GB के हिसाब से डाटा खरीदती है. हम लोग Tier 2 की कंपनियों से डाटा खरीदते है.

Tier 2 की कम्पनियाँ लैंडलाइन ओप्टिकल फाइबर केबल द्वारा अपने टावर को Tier 1 से कनेक्ट कर के रखते है. और वायरलेस नेटवर्क के माध्यम से इन्टरनेट कि सेवा हम तक पहुचाते है.

Types of internet

दोस्तों हम जिस इन्टरनेट का उपयोग करते है वह एक तरीके का सार्वजनिक नेटवर्क है जिसका प्रयोग कोई कोई भी कभी भी कर सकता है बस इसके लिए हमें नेटवर्क और डाटा कि आवश्यकता होती है.

लेकिन क्या आप जानते है कि इसके अलावा भी इन्टरनेट के कई प्रकार होते है अगर नहीं तो चलिए ये भी जान लेते है कि आखिर इन्टरनेट कितने प्रकार का होता है.

Intranet और Extranet ये भी एक प्रकार के इन्टरनेट ही है. हम से बहुत से कम ही लोग ऐसे है जो Intranet और extranet के बारे में जानते होंगे. आइय थोड़ा संक्षेप में इंट्रानेट और एक्सट्रानेट के बारे में भी जान लेते है. और जानेंगे Internet, Intranet और Extranet में अंतर क्या है.

Intranet Kya hai?

Intranet भी इन्टरनेट की ही तरह कई कंप्यूटरों का नेटवर्क होता है. लेकिन यह इन्टरनेट से थोडा भिन्न है क्यूंकि हम जिस इन्टरनेट का उपयोग करते है वह एक सार्वजानिक network होता है.

जबकि Intranet प्राइवेट नेटवर्क होता है जो इंटरनेट की ही तरह TCP/IP  के माध्यम से डेटा और एप्लीकेशन को Internal रूप से साझा करता है.

इस तरह के नेटवर्क में लोकल एरिया (LAN) के कई नेटवर्क आपस में जुड़े हुए हो सकते है. और वाइड एरिया नेटवर्क में लीज्ड लाइन्स का भी इस्तेमाल हो सकता हैं.

Intranet भी इन्टरनेट की ही तरह आपस में जुड़े कई कंप्यूटरों का जाल होता है. लेकिन यह नेटवर्क प्राइवेट होता है और हर कोई सार्वजानिक रूप से इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता है.

इस तरह के नेटवर्क का उपयोग करके कंपनी अपने एक ऑफिस को दूसरे ऑफिस से कनेक्ट रखती है. और उसको एक्सेस करने के लिए यूजर, पासवर्ड का प्रयोग किया जाता है. बिना यूजर पासवर्ड के कोई भी इसको एक्सेस नहीं कर सकता है. इंट्रानेट के बारे में और अधिक जानने के लिए पढ़ें इंट्रानेट के फायदे और इन्टरनेट में अंतर

Extranet Kya Hai?

इन्टरनेट से इंट्रानेट में जाने की प्रक्रिया Extranet कहलाती है. यह एक “Private network” है. जो पब्लिक नेटवर्क की सहायता से डाटा प्रदान करता है. यह कंपनी और व्यापारिक साझेदारों के बीच एक माध्यम की तरह काम करता है. यह कंपनी की एक शाखा को दूर स्थित दूसरी शाखा को आपस में जोड़ कर डाटा शेयरिंग करने कि अनुमति देता है.

इसको access करने के लिए user और password कि आवश्यकता होती है. यह Intranet का ही एक हिस्सा है. इसका प्रबंधन एक से अधिक संस्थाओं द्वारा किया जाता है.

Internet, Intranet और Extranet में अंतर

InternetIntranetExtranet
1. यह एक पब्लिक नेटवर्क है. इसे दुनिया का कोई भी व्यक्ति चला कर सकता है.यह एक प्राइवेट नेटवर्क है. इसका उपयोग कंपनी या संस्थाएं अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए करती है.यह भी प्राइवेट नेटवर्क है. यह पब्लिक नेटवर्क की सहायता से डाटा शेयर करने में माध्यम का काम करता है.
2. इन्टरनेट को चलाने के लिए किसी यूजर पासवर्ड कि आवश्यकता नहीं होती है.इंट्रानेट को चलाने के लिए यूजर पासवर्ड कि आवश्यकता होती है.इंट्रानेट कि ही तरह एक्सट्रानेट को भी चलाने के लिए यूजर पासवर्ड कि आवश्यकता होती है.
3. इसका उपयोग सामान्य व्यक्ति भी कर सकता है.इसको केवल एक संस्थान द्वारा चलाया जाता है.इसका प्रयोग दो या दो से अधिक संस्थाओं के बीच डाटा शयेर करने के लिए होता है.
4. इसमें बहुत सारे computers का नेटवर्क होता है.इसमें केवल एक ही संस्थान के कंप्यूटरों का नेटवर्क होता है.इसमें दो या दो से अधिक संस्थानों के कंप्यूटर आपस में कनेक्ट होते है.
5. इसकी सिक्योरिटी यूजर द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली डिवाइस पर निर्भर करती है.इंट्रानेट कि सिक्योरिटी फायरवाल पर निर्भर करती है.इसकी सिक्योरिटी इन्टरनेट और इंट्रानेट के फायरवाल पर निर्भर करती है.

 

इन्टरनेट के फायदे और नुकसान :

इन्टरनेट आज जहाँ इंसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है वही इसके बहुत से नकारात्मक पहलु भी है.  Internet in Hindi के इस लेख में हम इन्टरनेट के लाभ और हानियों के बारे में जानेंगे.

इन्टरनेट के लाभइन्टरनेट के नुकसान
1. इन्टरनेट कि सहायता से हम घर बैठे किसी भी जानकारी को प्राप्त कर सकते है.बहुत से लोग इन्टरनेट का दुरूपयोग भ्रामक और गलत जानकारियां फ़ैलाने के लिए भी करते है.
2. इन्टरनेट कि सहायता से हम घर बैठे व्यावसायिक कार्य भी कर सकते है.इन्टरनेट के माध्यम से लोगों कि जानकारी चुरा कर उनका गलत फायदा उठाया जा सकता है.
3. इन्टरनेट की मदद से हम 9xmovies hindi movie download करके ऑनलाइन फ्रेश एंटरटेनमेंट कर सकते है.बहुत से बच्चे गलत संगती में पड़ कर pornography जैसे अश्लील कंटेंट देखने लगते है. जिससे बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
4. इन्टरनेट कि मदद से youtube video Download भी कर सकते है.जरुरत से ज्यादा इन्टरनेट का इस्तेमाल करने से बहुमूल्य समय कि बर्बादी होती है.
5. इन्टरनेट कि सहायता से हम अपनी किसी भी इनफार्मेशन को ईमेल, facebook या whatsapp के माध्यम से तत्काल शेयर कर सकते है.आजकल बहुत से लोग ऑनलाइन फ्रॉड को अंजाम देते है जिसकी वजह से आपका आर्थिक नुकसान भी हो सकता है.
6. इन्टरनेट आज एजुकेशन के क्षेत्र में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है. एजुकेशन से सम्बंधित सभी प्रकार की जानकारियां इन्टरनेट पर सुगमता से उपलब्ध है.इन्टरनेट बहुत अधिक इस्तेमाल हमारे आँखों और शरीर के लिए बहुत ही नुकसानदायक है.
7. इन्टरनेट की सहायता से ticket booking, online banking जैसी सुविधाओं का लाभ घर बैठे ही उठा सकते है.बहुत सी एप और वेबसाइट ऐसी भी है जिनका प्रयोग करने पर हमारा पर्सनल डाटा चोरी हो सकता जो हमारा बहुत कुछ नुकसान कर सकता है.

ये तो हुआ संक्षेप में इन्टरनेट के फायदे और नुकसान के बारे में. अब जानते है इन्टरनेट के बारे में कुछ रोचक तथ्यों के बारे में भी.

क्या आप जानते है ?

  • क्या आप जानते है कि हम जो इन्टरनेट use करते है वह पुरे इन्टरनेट का मात्र 5% हिस्सा ही है.
  • क्या आप जानते है कि इन्टरनेट पूरी तरह से free है और हम जो चार्ज देते है वो इसकी मेंटिनेंस का खर्चा है.
  • क्या आप जानते है दुनिया का पहला इ-मेल सन् 1971 में अमेरिका के कैंब्रिज नामक स्थान पर रे टॉमलिंसन नामक इंजीनियर ने एक ही कमरे में रखे दो कंप्यूटरों के बीच भेजा था.
  • क्या आप जानते है दुनिया का सबसे पहला वायरस क्रीपर था जो अरपानेट पर खोजा गया था. यह सन 1970 की  शुरुआत में इंटरनेट से पहले आया था.
  • क्या आप जानते है www से पहले ईमेल बनाया गया था.
  • क्या आप जानते है आज भी दुनिया कि कुल आबादी 40% ही इन्टरनेट का इस्तेमाल करता है.

दोस्तों आशा करता हूँ आपको “Internet In Hindi Full Information” की जानकारी जरुर अच्छी लगी होगी. आप इसे facebook, whatsapp पर अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे. और निचे दिए आर्टिकल पढना ना भूले.