Surya Namaskar कैसे करें और सूर्य नमस्कार के फ़ायदे

सूर्य नमस्कार: आज की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग पैसा तो बहुत कमाने लग गए हैं पर अपने जीवन की सबसे कीमती चीज़ ‘स्वास्थ्य‘ उसे खोते चले जा रहे हैं. एक अध्यन में यह बात साबित भी हो चुकी है कि आज से 100 वर्षों पहले भारतीय लोगों की प्रतिरोधक क्षमता आज जितनी है उससे तीन गुनी हुआ करती थी. और इसका कारण था पवित्र भोजन और योग. आज भारत में शाकाहारी भोजन करने वाले तो सिर्फ 23% ही लोग बचे हैं, और योग भी कुछ लोग ही करते हैं.

यदि भारत का हर व्यक्ति योग करना शुरू कर दें तो 90% बीमारियां तो वैसे ही खत्म हो जाएंगी, और हमारा देश दुनिया का सबसे स्वस्थ देश बन जाएगा. आज इस लेख में हम बात करेंगे योग के सबसे शक्तिशाली आसनों में से एक सूर्य नमस्कार के बारे में, जिसे यदि आप करते हैं तो आपकी शारीरिक एवं मानसिक परेशानियां दूर होती हैं और आप एक स्वस्थ और लंबा जीवन जी पाते हैं.

आज के इस Yoga Health tips in Hindi में हम आपके लिए लेकर आये है एक सम्पूर्ण शारीरिक व्यायाम जिसे हम Surya Namaskar के नाम से जानते है तो आइये जानते है.

सूर्य नमस्कार क्या है ?

सूर्य नमस्कार भारत में सदियों से योग गुरुओं के द्वारा सिखाया जाता रहा है. यह कई योगो का एक सामूहिक योग है जिसमे कई सारे व्यायाम आ जाते है. सूर्य नमस्कार के अंदर 12 आसन होते हैं और इन्हीं 12 आसनों का समूह सूर्य नमस्कार कहलाता है और इसको करने से शारीर का पूरा व्यायाम हो जाता है. सूर्य नमस्कार का मतलब होता है सुबह उठ कर सूर्य को नमस्कार करना.

सूर्य नमस्कार सुबह सूर्योदय के समय किया जाता है. सूर्य नमस्कार करने से शारीरिक परेशानियां जैसे कि कमर दर्द, पीठ दर्द, गर्दन में दर्द, जोड़ों में दर्द आदि जैसी कई परेशानियों से छुटकारा मिलता है तो वहीं मानसिक शांति भी मिलती है. तो आइए हम विस्तार से जानते हैं सूर्य नमस्कार कैसे किया जाता है और इसके क्या फायदे शरीर और दिमाग को होते हैं.

सूर्य नमस्कार कैसे करते हैं – जानें पूरे विस्तार से

सूर्य नमस्कार को करने का सबसे सही समय होता है सुबह सूर्योदय के समय, क्योंकि इस समय भगवान सूर्य का उदय हो रहा होता है, और हम उनके प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए उन्हें 12 आसनों के द्वारा प्रणाम करते हैं. यह 12 आसन शरीर को तो फायदा पहुंचाते ही है, साथ ही दिमाग को भी चुस्त, दुरुस्त बनाते हैं साथ ही दिमाग को शांति प्रदान करते हैं.

सूर्य नमस्कार करने से पहले सुबह 5:00 बजे उठ जाएं और बाथरूम में जाकर फ्रेश हो जाए. ध्यान रहे कि आपका पेट खाली होना चाहिए और आपने सूर्य नमस्कार करने से 4 घंटे पहले तक कुछ भी ना खाया हो. अब किसी शांत जगह पर चले जाएं जहां से सूर्य दिखाई देता हो या किसी खुले जगह पर चले जाएं जहां माहौल शांत हो. आप चाहे तो सूर्यास्त के समय यानी कि शाम को भी सूर्य नमस्कार कर सकते हैं, बस आपका पेट खाली होना चाहिए तभी इसका लाभ आपके शरीर को मिलता है. तो आइए जानते हैं सूर्य नमस्कार के 12 आसनों के बारे में.

1) प्रणाम आसन (Surya Namaskar)

सबसे पहले सूर्य की ओर मुख करके सीधे खड़े हो जाए और अपने दोनों हाथ आपस में जोड़ ले, अपनी आंखें बंद करके सूर्य का ध्यान करें और अपना ध्यान आज्ञा चक्र पर केंद्रित करें. यह सूर्य नमस्कार आसन की पहली योग क्रिया है नीचे दिए चित्र में देखें.

प्रणाम आसन
प्रणाम आसन

2) हस्तउत्तानासन (Surya Namaskar)

अब सांस भरते हुए दोनों हाथों को अपने कानों से हटाते हुए ऊपर की ओर उठाएं कमर पीछे झुकाए और पीछे झुकते हुए प्रणाम करें और अपने ध्यान को गर्दन के पीछे केंद्रित करें. इस आसन को करने से त्वचा और कमर के रोग दूर होते हैं व पीठ को मजबूती मिलती है. यह सूर्य नमस्कार आसन की दूसरी योग क्रिया है नीचे दिए चित्र में देखें.

हस्तउत्तानासन
हस्तउत्तानासन

3) हस्तपाद आसन (Surya Namaskar)

अब आप सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों को कानों में सटाये हुए विपरीत दिशा में नीचे की ओर झुके, और अपने पैरों के दाएं बाएं जगह पर अपने हाथों को रखें अथवा अपने घुटनों को सीधा रखें अपने माथे को घुटने पर सटाए रखें और अपनी नाभि पर अपना ध्यान केंद्रित करें कुछ क्षण तक ऐसे ही रुके रहे जिन्हें कमर दर्द की समस्या है वह इस आसन को जरूर करें. यह सूर्य नमस्कार आसन की तीसरी योग क्रिया है नीचे दिए चित्र में देखें.

हस्तपाद आसन
हस्तपाद आसन

4) अश्व संचालन आसन (Surya Namaskar)

अब इसी स्थिति में सांस को भरते हुए अपना बाएं पैर को पीछे की ओर लेकर जाएं और गर्दन को पीछे झुकाए, मेरूदंड सीधा और लम्बवत रहना चाहिए.  अब अपने ध्यान को स्वाधिस्ठान पर ले जाएं और इसी अवस्था में कुछ दे रहे. इस आसन से जंघाओं में स्थित तनाव दूर होता है.

यदि आपके घुटने अथवा नितम्बों में किसी प्रकार की परेशानी हो तो ऐसी अवस्था में अश्व संचालन आसन मद्रा का अभ्यास नहीं करना चाहिए. यह सूर्य नमस्कार आसन की चौथी योग क्रिया है नीचे दिए चित्र में देखें.

अश्व संचालन आसन
अश्व संचालन आसन

5) दंडासन (Surya Namaskar)

अब सांस छोड़ते हुए अपने दायें पैर को भी पीछे ले जाए और अपने बाएं पैर की एड़ी से मिला ले, अब अपने पूरे शरीर का खिंचाव को पैरों पर दे. इस अवस्था के दौरान पैरों के तलवे भूमि पर लगने चाहिए. नितंबों को अधिक से अधिक उठाएं और अपना ध्यान सहस्रार चक्र पर रखें.

यह आसन श्वशन तंत्र को बहुत ही अधिक लाभ लाभ पहुचता है. स्वांस रोगियों के लिए यह बहुत सी अच्छा आसन है. यह सूर्य नमस्कार आसन की पांचवी योग क्रिया है नीचे दिए चित्र में देखें.

दंडासन
दंडासन

6) अष्टांग नमस्कार आसन

इसके बाद सांस भरते हुए शरीर को ज़मीन के समान्तर, सीधा साष्टांग दंडवत करें और पहले घुटने, छाती और माथा ज़मीन पर लगा दें. नितंबो को भूमि से थोड़ा ऊपर उठा रहने दें, साँस को छोड़ दें. ध्यान को अनहार चक्र पर टिका दें और स्वांस को सामान्य करे. इस आसन से इन्द्रियों में व्याप्त चंचलता समाप्त होती है और मन को शांति मिलती है. यह सूर्य नमस्कार आसन की छठी योग क्रिया है नीचे दिए चित्र में देखें.

अष्टांग नमस्कार आसन
अष्टांग नमस्कार आसन

7) भुजंग आसन (Surya Namaskar)

इस अवस्था में धीरे-धीरे सांस भरते हुए अपनी छाती को आगे की ओर खींचें और अपने हाथों को जमीन से सीधा खड़ा करें . अपने गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं और अपने कमर को जमीन से सटाए रखें. कुछ समय तक इसी अवस्था में रहे. इस आसन को करने से सीना चौड़ा होता है, और पेट की चर्बी कम होती जिससे वजन कम बढ़ता है. यह व्यायाम Chest badhane ki exercise है. इस आसन को नियमित करने से शरीर सुंदर तथा कान्तिमय बनता है. यह आसन सूर्य नमस्कार की सातवीं योग क्रिया है नीचे दिए चित्र में देखें.

भुजंग आसन

8) पर्वत आसन – सूर्य नमस्कार

अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपने कमर को ऊपर की ओर खींचे आपके दोनों हाथ और दोनों पैर ज़मीन से सीधे सटे रहेंगे. ध्यान रहे इस आसन को करते समय पैर के पुरे तलवे भूमि को चुने चाहिए. यह आकार एक पर्वत की तरह दिखाई देगा. अपनी गर्दन को नीचे की ओर झुकाएं और इसी अवस्था में कुछ देर तक रहे और अपने ध्यान को संस्कार चक्र पर केंद्रित रखें. इस आसन को करने से पीठ और पसलियां मजबूत हो जाती हैं. यह आसन करने से फेफड़े मजबूत होते है स्वांस रोग से सम्बंधित की बीमारियों को दूर करता है. यह आसन सूर्य नमस्कार की आठवीं योग क्रिया है नीचे दिए चित्र में देखें.

पर्वत आसन
पर्वत आसन

9) अश्वसंचालन आसन

अब सांस धीरे-धीरे भरते हुए अपने बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाए और अपनी छाती को आगे की ओर खींचे और अपनी गर्दन पीछे की ओर झुकाएं. कुछ समय इस अवस्था में बिताए और अपना ध्यान स्वाधिष्ठान पर ले जाए. यह आसन सूर्य नमस्कार के चौथे आसन की पुनरावृत्ति है.

अश्वसंचालन आसन
अश्वसंचालन आसन

10) हस्तपाद आसन

अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके और अपने दोनों हाथ अपने पैरों के दाएं बाएं जाकर रख दें आपका माथा आपके घुटने से सटा होना चाहिए और इस अवस्था में कुछ देर रुके. अपने ध्यान को अपनी नाभि पर केंद्रित कर ले. यह आसन सूर्य नमस्कार के तीसरे आसन की पुनरावृत्ति है. नीचे चित्र में देखें

हस्तपाद आसन
हस्तपाद आसन

11) हस्तउत्तानासन

अब सांस भरते हुए दोनों हाथों को अपने कानों से हटाते हुए ऊपर की ओर उठाएं कमर पीछे झुकाए और पीछे झुकते हुए प्रणाम करें और अपने ध्यान को गर्दन के पीछे केंद्रित करें. यह आसन सूर्य नमस्कार के दूसरे आसन की पुनरावृत्ति है. निचे दिए गए चित्र में देखें

हस्तउत्तानासन
हस्तउत्तानासन

12) प्रणाम आसान

सबसे पहले सूर्य की ओर मुख करके सीधा खड़ा हो जाए और अपने हाथ जोड़ ले अपनी आंखें बंद करके सूर्य का ध्यान करें और अपना ध्यान फिर से आज्ञा चक्र पर केंद्रित करें. यह आसन बहुत कुछ ताड़ासन से मिलता जुलता है जो हाइट बढ़ाने का योगा है.  यह आसन सूर्य नमस्कार के पहले आसन की पुनरावृत्ति है. निचे दिए गए चित्र में देखें

प्रणाम आसन
प्रणाम आसन

सूर्य नमस्कार के चमत्कारी फायदे –

  • सूर्य नमस्कार करने से शरीर ऊर्जा से भर जाता है और शरीर में चुस्ती और फुर्ती आती है.
  • सूर्य नमस्कार करने से शरीर में लचीलापन बढ़ता है.
  • सूर्य नमस्कार करने से दिमाग तेज होता है और मन की शांति बढ़ती है एवं तनाव भी कम होता है .
  • सूर्य नमस्कार करने से कमर दर्द में बहुत ज्यादा राहत मिलती है जिन लोगों को कमर या जोड़ों से संबंधित दर्द हो उन्हें सूर्य नमस्कार अवश्य करना चाहिए.
  • सूर्य नमस्कार करने से त्वचा की चमक और चेहरे का तेज बढ़ता है.
  • सूर्य नमस्कार करने से शरीर में विटामिन डी की मात्रा बढ़ती है जिससे हड्डियां मजबूत होती है.
  • सूर्य नमस्कार करने से शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ती है एवं रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा भी बढ़ने लगती है.
  • सूर्य नमस्कार करने से पाचन तंत्र मजबूत बनता है एवं कब्ज एसिडिटी जैसी समस्याएं ठीक होती है.
  • सूर्य नमस्कार करने से मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है एवं शरीर में लचीलापन आता है.
  • सूर्य नमस्कार करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है.
  • सूर्य नमस्कार करने से डायबिटीज के मरीजों को काफी फायदा होता है.
  • सूर्य नमस्कार करने से ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है.
  • सूर्य नमस्कार करने से बालों का झड़ना कम होता है एवं बालों के स्वास्थ्य के लिए सूर्य नमस्कार बहुत ही फायदेमंद होता है.

सूर्य नमस्कार करने से पहले ध्यान रखें कुछ बातें

  • सूर्य नमस्कार करने का सबसे सही समय सुबह सूर्योदय के वक्त होता है पर आप इसे कभी भी कर सकते हैं.
  • सूर्य नमस्कार करते समय आपका पेट बिल्कुल खाली होना चाहिए यानी कि आपने 4 घंटे पहले तक कुछ भी ना खाया हो.
  • सूर्य नमस्कार हमेशा खुली जगह पर करना चाहिए जहां पर ऑक्सीजन की मात्रा अच्छी हो बेहतर होगा कि आप इसे अपनी छत पर जाकर करें.
  • यदि आप एक स्वस्थ शरीर एवं शांत मन चाहते हैं तो सुबह उठते ही अपने दिन की शुरुआत सूर्य नमस्कार से करें और भगवान सूर्य से प्रार्थना करें कि वह आपके जीवन को अपनी रोशनी से भर दे.

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सावधानियां :

ध्यान रहे कि सूर्य नमस्कार करने की गति सामान्य होनी चाहिए. प्रत्येक आसन की मुद्रा कम से कम 3 सेकंड तक रहनी. एक स्थिति में सांस सामान्य होने के बाद ही दूसरी स्थिति शुरू करें. यदि आप हाई ब्लड के मरीज या स्लिप डिस्क से पीड़ित है तो आपको यह योगासन नहीं करना करना चाहिए. गर्भवती महिलाओं को सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए.

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