मार्शल आर्ट्स के जनक बोधिधर्म का इतिहास : Bodhidharma History In Hindi

Bodhidharma History In Hindi: जब भी मार्शल आर्ट्स की बात होती है तो हमारे मस्तिष्क में सबसे पहले चीन और वहां के शओलिन टेम्पल के बौद्ध भिक्षुओं की तस्वीरें दौड़ने लगती है, और हमें ऐसा लगता है कि मार्शल आर्ट्स का अविष्कार चीन में हुआ होगा।

लेकिन अगर मैं आपसे कहूँ कि मार्शल आर्ट्स का अविष्कार चीन में नहीं बल्कि भारत में हुआ था, तो शायद आपको एक बार इस बात पर विश्वास न हो लेकिन यह बात पूरी तरह से सच है कि मार्शल आर्ट्स भारत से एक बौध भिक्षु द्वारा चीन तक पहुंचा था और इस बौध भिक्षु का नाम था बोदिधर्म। आज हम Bodhidharma की History के साथ साथ भारत में मार्शल आर्ट्स के इतिहास के बारे में जानेंगे।

Bodhidharma History In Hindi : बोधिधर्म का इतिहास

मार्शल आर्ट्स के जनक व बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म का जन्म पाचवी शताब्दी के आस पास दक्षिण भारत में हुआ था। ये पल्लव राज्य के राजा सुगन्ध के तीसरे पुत्र थे। बाल्यकाल से यह विलक्षण बुद्धि के थे। वह राजधर्म की शिक्षाओं के साथ योग, शस्त्र शिक्षा, कलरीपायट्टु और धार्मिक शिक्षाओं का अध्यन गहनता से अध्यन करते थे। बोदिधर्म को पल्लव राज्य का राजा बनने की कोई इच्छा नहीं थी।

वह बचपन से ही बौद्धधर्म की शिक्षाओं से प्रेरित थे और बौद्ध भिक्षु बनने की लालसा में उन्होंने छोटी उम्र में ही राज्य का त्याग कर दिया। इसके बाद वह बौद्ध भिक्षु बन गए। बोधिधर्म ने बौद्ध के सभी संस्कारों और दीक्षाओं को बहुत ही जल्दी आत्मसात कर लिया और मात्र 22 वर्ष की आयु में उन्होंने सम्बोद्धि यानि कि मोक्ष की पहली अवस्था को प्राप्त कर लिया।

मोक्ष की पहली अवस्था को प्राप्त करने के बाद उन्हें बौद्ध धर्म को पडोसी देशों तक प्रचारित करने की आत्म प्रेरणा मिली। और उन्होंने ने चीन, जापान, कोरिया में बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया। बोधिधर्म को जापान में दारुमा के नाम से जाना जाता है। दारुमा को चीन में ज़ैन बौद्धवाद के संस्थापक के रूप में भी जाना जाता है

520 से 526 वी ई० में चीन में ध्यान संप्रदाय की नीव रखी जिसे चों या झेन के नाम से संबोधित किया जाता है। जब वह चीन गए तो उस समय वह मार्शल आर्टस के साथ साथ औषधियों का भी अध्यन कर रहे थे।

Bodhidharma ने चीन जाकर बौद्ध धर्म की शिक्षाओं के साथ-साथ आयुर्वेद, योग, और लड़ने की कला मार्शल आर्ट्स का प्रचार किया और अपने शिष्यों को इसका ज्ञान देकर उन्हें इस विद्या में पारंगत बनाया।

Bodhidharma Story In Hindi: बोधिधार्मा की कहानी

bodhidharma history in hindi
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मार्शल आर्ट्स का नाम आते ही हमारे दिमाग में चीन का नाम याद आता है और आम तौर पे हम भारतीय यही समझते है की मार्शल की कला का अविष्कारक चीन है. जबकि सच्चाई इसके विपरीत है. मार्शल आर्ट्स में सबसे मुख्य है कुंग फु और दुनिया में इसे सीखने की सबसे अच्छी जगह है चाइना।

चाइना में मार्शल आर्ट्स के कई स्कूल है जिनमे से सबसे प्रसिद्ध है शाओलिन टेम्पल। शाओलिन टेम्पल बौद्ध मंदिर होने के साथ साथ आत्म रक्षा प्रशिक्षण का केंद्र भी है जहाँ कुंग फु के साथ-साथ ध्यान व योग भी सिखाया जाता है। इस शाओलिन टेम्पल की आधारशिला एक भारतीय ने भिक्षु ने रखी थी जिनका नाम है बोधिधर्मा (Bodhdharma)। बोधिधर्मा कुंग-फू के आविष्कारक थे। चीन में बोधिधर्मा को कुंग-फू का पितामह कहा जाता है और शाओलिन में उनके नाम पर कई मंदिर हैं जहा मार्शल आर्ट्स सिखाया जाता है.

बोधिधर्म के जीवन से सम्बंधित महत्वपूर्ण बाते

bodhidharma story in hindi
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बोधिधर्म का अधिकतम जीवन ध्यान अवस्था में ही बीता. वे न सिर्फ एक विलक्षण योगी थे बल्कि औषधि विज्ञानं का भी गूढ़ज्ञान रखते थे. इन्होने चीन की यात्रा समुद्री मार्ग से पूरी की थी और भारत में अर्जित किये गए ज्ञान को चीन तक पहुचाया. भारत में बहुत कम ही लोग बोधिधर्म के बारे में जानते है. बोधिधर्म बुद्ध परंपरा परम्परा के अट्ठाइसवें और अन्तिम गुरु हुए. बोधिधर्म के प्रथम शिष्य का नाम शैन-क्कंग था, जिसे शिष्य बनने के बाद उन्होंने हुई-के नाम दिया.

भारत में मार्शल आर्ट्स का इतिहास : Martial arts history in India

यदि भारत में मार्शल आर्ट्स के इतिहास को खंगाला जाए तो महाभारत आदि प्राचीन ग्रंथो में सबसे पहले इस विद्या का वर्णन मिलता है जहाँ इसे नियुद्ध के नाम से उल्लेखित किया गया है. निःयुद्ध एक प्राचीन भारतीय कला है. नियुद्ध शब्द का अर्थ है ‘बिना हथियार के युद्ध’ अर्थात् स्वयं निःशस्त्र रहते हुये आक्रमण तथा संरक्षण करने की कला.

दक्षिण भारत में इस कला को कलरीपायट्टु के नाम से जाता हैं. यह भारतीय विद्या बौद्ध भिक्षुओं तथा प्रवासी भारतीयों द्वारा विश्व के अनेक देशों में गयी तथा इससे अनेक युद्ध कलाओं का जन्म हुआ. यह कला जिस देश में पहुंची वहां के लोगों ने इसे अपनी स्थानीय भाषाओँ में एक नया नाम दिया.

चीन जैसे देश में इस विद्या को मार्शल आर्ट्स का नाम दिया दिया गया और आज पूरा विश्व इसे मार्शल आर्ट्स के ही नाम से ही जानता है. दुःख की बात तो यह है जो विद्या भारत जैसे देश से विदेशों में गयी और विश्व के सारे देशों से इसके जनक देश का नाम पुचा जाए तो संभवता सभी एक स्वर में चीन का नाम लेंगे ना कि भारत का.

हमारे देश के तथाकथित विद्वानों ने हमेशा से ही पश्चिम की तरफ देखा और खुद के देश की संस्कृति, चिकत्सा विज्ञानं, अर्थशास्त्र, गणित शास्त्र, युद्ध कला ज्ञान, विज्ञानं और योग आदि को कभी भी प्रचारित नहीं किया और ना ही उसे सम्मान दिलाने का प्रयास किया.

दोस्तों इन्हीं बोधिधर्म के जीवन पर साउथ में एक फिल्म बनी थी जो कई भाषाओँ में उपलब्ध है इस मूवी का नाम chennai vs china movie in hindi है। आप में से बहुत से लोगों ने इस मूवी को देखा भी होगा। यदि आपने अभी तक इस मूवी को नहीं देखा है तो आप इसे इन्टरनेट पर सर्च करके देख सकते है। आशा करता हूँ दोस्तों आपको मार्शल आर्ट्स के आधुनिक जनक Bodhidharma History In Hindi लेख की जानकारी अच्छी लगी होगी.

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